मुक्तक

 बसा रखा जिसे अंतर्मन में वो मिथ्या जगत में जीता है ।

रहता तो मेरे साथ मगर कोई और मधुरस पीता है ।।

कसमें वादे संग मुझसे होते साथ निभाते रहने का ।

हृदय उसका लगता अक्सर रहता रंज से रीता है ।।

रेखा अस्मिता


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