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एक प्रश्न को सुलझाए कोई

#___एक_प्रश्न_को_सुलझाए_कोई आज भारत में चारो ओर जय हिंद के नारे लगाए जा रहे हैं । सभी अपनी अपनी वक्तव्य शैली उसमें जोड़ता चला जा रहा है । कवि-कवयित्रियाँ भारत माता की जयघोष कर रहे हैं। मुझे तो उन लोगों पर हँसी आती हे जो कहते हैं- मेरा भारत महान । मै पूछती हूँ भारत महान कहाँ से है । भारत में कितने ही वीर पुरुष , गुणी जन , विद्वान तथा बहुत से ऐसे लोगों ने जन्म लिया तथा भारत के लिए बहुत कुछ किया लेकिन फिर भी भारत महान न हो सका । भारत को महान कहने वाले मुझे ये तो बताओ भारत किस क्षेत्र में महान है । धर्म मजहब के नाम पर यहाँ दंगे, सांप्रदायिक दंगे, कानून उल्लंघन में नं०. 1, गरीबी , लैंगिक विषमता , शोषण, अपहरण... ..... और भी न जाने कितने ही समस्याओं से ग्रस्त है हमारा भारत । लेकिन सरकार को कुछ समस्याओं का ही ध्यान है । मै कहती हूँ सिर्फ सरकार बदलने से कुछ नहीं होगा हमें स्वयं को बदलना होगा । क्योंकि सरकारें तो बहुत सी आई और गई लेकिन कर कुछ नही पाई । चलो इतना ही बता दो कि क्या भारत में व्यक्ति बोल सकता है ? नहीं बोल सकता क्योंकि यह गूँगे बहरो का देश है । जनता गूँगी है और सरकार बहरी । मै...

और आंसू बहते गए

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 कॉलेज से लौटते समय बस में बैठी सुहानी सोच रही थी ट्विटर अकाउंट चेक कर लेती हूँ काफी दिन हो गए। जैसे ही ट्विटर अकाउंट खोला मैसेज की बाढ़ पड़ी थी । सब के सब मेसेज अभिमान के थे । कैसी हो?कहाँ हो?  व्हाट्सप्प फेसबुक फोन नम्बर सब बन्द क्यों है? क्या बात है तुम ठीक तो हो न? मेरी शादी तय हो गई है आने वाले दस दिन के अंदर मेरी शादी होने वाली है। बस इतना पढ़ना था कि सुहानी हँस पड़ी और ज्योति उसकी दोस्त जो कि उसके साथ बैठ थी बोली क्या हुआ सुहानी इतना क्या हंस रही है क्या मिल गया? अरे यार ज्योति ये देखो अभिमान को , क्या बोल रहे हैं कि उनकी शादी तय हो गयी है और अगले 10 दिन में शादी है। मतलब मैं ही मिली हूँ उनको आज बेवकूफ बनाने के लिए। मज़ाक भी कोई ऐसे करता है क्या ।  मैं सब जानती हूं चार दिन मैंने बात नही की न, इसलिए मुझसे नाराज हैं तभी ऐसी बात कर रहे हैं । देखना ज्योति मैं अभी फोन करती हूं और देखना कैसे मना लेती हूँ सारी नाराजगी अभी दूर कर दूंगी । अभी होगी इनकी शादी कहीं और वो भी मेरे होते हुए ,चार साल ऐसे ही थोड़ी साथ रहे हैं ।गुस्सा जायज है लेकिन ऐसा मज़ाक बिल्कुल जायज नही है। सुहानी ने...

आगे बढ़ने की होड़ में

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।। आगे बढ़ने की होड़ में ।। मज़बूती थी पहले कभी रिश्तों की डोर में । टूट रहा आहिस्ते से आगे बढ़ने की होड़ में । मज़हब और धर्म में अब बंट गया इंसान है । कौड़ियों के भाव में अब बिक रहा ईमान है ।। खो रहा अपनत्व भाव दिखावे के शोर में । टूट रहा आहिस्ते से आगे बढ़ने की होड़ में ।। महक फूलों में नही अब शीशियों में बिकता है । मन उलझा हो तो एक जगह कहाँ टिकता है ।। खो रहा अस्तित्व है आधुनिकता के शोर में । टूट रहा आहिस्ते से आगे बढ़ने की होड़ में ।। रेखाअस्मिता

मुक्तक

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 बसा रखा जिसे अंतर्मन में वो मिथ्या जगत में जीता है । रहता तो मेरे साथ मगर कोई और मधुरस पीता है ।। कसमें वादे संग मुझसे होते साथ निभाते रहने का । हृदय उसका लगता अक्सर रहता रंज से रीता है ।। रेखा अस्मिता