जय श्री राम
जय श्री राम
राम को तुमने कितना जाना
राम को तुमने क्या पहचाना
भगवा धारण करने वाला
अक्सर राम नही होता ।।
राम यदि बनना है तुमको
तो कठिन तपस्या करना होगा
वन गमन की नही ज़रूरत
मन को वश में करना होगा।।
मर्यादा में रहना होगा
कष्टों को भी सहना होगा
लोभ मोह को छोड़छाड़ कर
सादा जीवन जीना होगा।।
अनुशासन में रहना होगा
दोषों को भी सहना होगा
जाति धर्म से ऊपर उठकर
मानवता को चुनना होगा।।
जग के तारणहार बनो तुम
प्रजा के पालनहार बनो तुम
नही भ्रम में पड़ना होगा
कीर्तिमान भी गढ़ना होगा।।
राम सभी मे छिपा हुआ पर
रावण सदा उदय होता
रावण यदि विजय हुआ तो
तुम राम नही बन पाओगे।।
उठ जाओ फिर शस्त्र उठा लो
रावण रूपी सर को काटो
काम क्रोध लोभ मोह लालच
राग द्वेष मद अहम और आलस ।।
इन सबका गर करोगे त्याग
तो समझोगे राम का मान
सनातनी हो जन्म से तुम तो
कर्म में सनातन उत्पन्न कर लो ।।
सत्य का साथ कभी न छोड़ो
झूठ का साथ कभी न जोड़ो
हिन्दू होने पर गर्व करो
और हिंदुत्व का सम्मान करो।।
राम नाम की महिमा व्यापक
जग में कही सुनी जाती है
हिंदुस्तान में सनातनी की
गाथा सदा गुनी जाती है।।
राम नाम का सुमिरन कर लूँ
राम नाम को धारण कर लूँ
राम नाम के हीरे मोती
अपनी कविता में मैं गढ़ लूँ।।
राम को जप लो नाम को जप लो
तुलसी के मानस को पढ़ लो
कोई नही है राम सा दूजा
राम राम जयघोष है कुजा।।
✍️ रेखा अस्मिता
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